पापा ने मुझे सुहागन बनाया
हाय,
मेरा नाम मीनाक्षी है और प्यार से सब मुझे मीना बुलाते हैं। मैं उदयपुर की रहने वाली एक साधारण सी महिला हूँ। मेरी उम्र 39 वर्ष है, कद 5 फीट 2 इंच है, शरीर पतला दुबला, फिगर 30-28-32 इंच है।
मेरे पति का एक सड़क दुर्घटना में देहांत हो गया है उसके बाद से मैं उनकी विधवा बन कर अपने बेटे के साथ अपना जीवन यापन कर रही हूँ।
जब पति जिंदा थे तब वो मुझे बहुत चोदते थे। वो कभी भी मुझे चोदने का मौका हाथ से नहीं जाने देते और जब भी मुझ पर चढ़ते थे, मुझे संतुष्ट करके ही दम लेते थे। लेकिन उनकी मृत्यु के बाद मुझसे मेरी ये खुशी छीन गई। मेरे जीवन में चुदाई का अकाल पड़ गया।
कुछ समय तो जैसे तैसे करके निकाल लिया, लेकिन उसके बाद मुझे मेरे पति की कमी बहुत खलने लगी थी। रात होते ही जब मैं सोने की कोशिश करती तो मुझे बहुत खाली पन लगता और मुझे वो सब याद आता था की किस तरह से मेरे पति मुझे चोद- चोद कर मुझे खुश करते थे और मैं उनकी बाहों में सिमट कर रह जाती। उनका मोटा लंड मैं बहुत मिस करती, और ये सब सोच कर मेरा चुदवाने का मूड बन जाता, और मैं उदास होकर सो जाती।
ऐसा काफी दिनों तक चलता रहा, मैं समझ नही पा रही थी की इस सब से बाहर कैसे निकलूँ।
मैं एक साधारण से परिवार में पली बढ़ी हूँ, आज तक कोई बॉयफ्रेंड भी नही बनाया था, क्यों की डरती थी की किसी को पता चलेगा तो घरवालों की इज्जत खराब होगी। इसलिए मेरे पास ऐसा कोई नहीं था जिससे मैं मेरी शरीरिक जरूरतों को पूरा कर सकूँ।
एक दिन मेरा बेटा मेरे पीहर उसकी नानी के घर गया हुआ था और घर पर मैं, पापा (ससुर जी) और मम्मी (सास) हम लोग ही थे। रात को मैं अपने कमरे में अकेले मायूस होकर लेटी हुई थी। अकेली थी इसलिए आज ज्यादा बुरा लग रहा था की कोई चोदने वाला भी नहीं हैं। यही सोचते- सोचते रात के 2 बज गये लेकिन मुझे नींद नहीं आई। और जब आधी रात में नींद आई तो सुबह उठने का ठिकाना ही नहीं रहा।
सुबह मेरे दरवाजे पर खटखटाने की आवाज आई, aavaj सुनकर मेरी आँख खुली और मैंने घड़ी पर नज़र डाली तो मेरा दिमाग खराब हो गया, ऐसा पहली बार हुआ था की घड़ी में सुबह के 11 बज रहे हैं और मैं सोई हूँ, बाकी मैं रोज सुबह 7 बजे उठ जाती हूँ।
मुझे लगा दरवाजे पर मम्मी होंगे, तो मैं ऐसे ही उठ कर दरवाजा खोलने चली गई। उस समय मैंने सफेद रंग का पेटीकोट और ब्लाउज पहन रखा था, और ब्लाउज के अंदर ब्रा भी नहीं पहनी थी क्योंकि रात को मैं बिना ब्रा के ही सोती हूँ।
मैंने जाते ही दरवाजा खोल दिया, और देखा तो सामने पापा खड़े थे। पापा मुझे घूर कर देखने लगे लेकिन मैं नींद मैं थी तो उन पर इतना ध्यान नहीं गया, लेकिन उनको देखते ही ये याद आ गया की मैंने साडी नहीं पहनी।
मैं झट से वापस कमरे में आई और साडी उठा कर लपेटने लगी। पापा दरवाजे से ही बोले – बेटा ! आज इतना लेट क्यों उठी? तबीयत ठीक नहीं हैं क्या?
रात को जागने और सुबह अचानक से उठने की वजह से मेरा सर भारी हो रहा था इसलिए मैंने पापा से कहा – हाँ पापा, थोड़ा सर में दर्द कर रहा है।
पापा बोले – कुछ खा कर सर दर्द की दवाई ले लो और थोड़ी देर और सो जाओ।
मैंने पूछा- ठीक है, मम्मी कहाँ हैं?
पापा बोले – वो तो शहर चली गई, उसको कुछ काम है इसलिए।
पापा उनके कमरे में चले गए और मैं अलमारी के काँच के सामने खड़ी हो कर साडी पहनने लगी और तभी मेरी नज़र मेरे ब्लाउज पर पड़ी, और मैं शर्म से लाल हो गई। क्यों कि ब्लाउज सफेद रंग का था और पतला सा था इसलिए मेरे निप्पल बाहर से साफ दिखाई दे रहे थे।
फिर मैंने साडी को हटा कर देखा तो पेटीकोट भी वैसा ही था और मेरी नीले रंग की पैंटी काफी हद तक दिख रही थी।
मुझे तो ये सोचकर शर्म आ रही थी की इस हालत में मैं पापा के सामने चली गई, पापा ने अगर मुझे ऐसे देख लिया होगा तो मेरे बारे में क्या सोच रहे होंगे। और मैंने दिमाग पर ज़ोर डाला तो मुझे याद आया की पापा तो मुझे घूर रहे थे।
अब तो मुझे यकीन हो गया की पापा ने मेरे निप्पल देख लिए, और मुझे गुस्सा आने लगा की वो मुझे ऐसे कैसे देख रहे थे, लेकिन गलती तो मेरी है जो ऐसे ही उठ कर उनके सामने चली गई।
मैं अब घर के काम में लग गई लेकिन मेरी आँखों में अब भी शर्म थी। पापा से नजरे नहीं मिला रही थी और बस अपना काम कर रही थी। और सारे काम निपटा कर दोपहर में खाना खाया और अपने बेड पर जाकर लेट गई, और मेरी आँख लग गई।
कुछ देर बाद मुझे महसूस हुआ की जैसे मेरे पास कोई बैठा हो, और मेरी आँखे खुली। मैंने देखा कि पापा मेरे पास बैठे हुए मुझे देख रहे थे। मैं एक दम से उठने की कोशिश करने लगी लेकिन पापा ने रोक दिया और बोले- कोई बात नहीं मीना ! तेरी तबीयत खराब है, तु आराम कर।
तुझे सुबह क्या हुआ था?
मुझे पता चल गया था की किस बारे में बात हो रही है। तो मैंने असहज महसूस करते हुए बात से अंजान बन कर पूछा – मुझे क्या हुआ सुबह? किस बारे में बात कर रहे हो पापा?
पापा – सुबह जब मै तुझे उठाने आया था तब।
मैं – तब क्या हुआ था?
पापा – तु बहुत सुंदर दिख रही थी।
ये सुनकर मेरी बोलती बंद हो गई और मुझे शर्म आने लगी। मैंने साडी के पल्लू से अपना मुंह छुपा लिया।
पापा ने पल्लू को हटाया और बोले – सच कह रहा हूँ मीना, तु बहुत सुंदर है, और सुबह तो कुछ ज्यादा ही सुंदर लग रही थी। शायद तुझे पता ना हो लेकिन सुबह तेरे ब्लाउज से तेरे निप्पल दिख रहे थे, अभी भी मेरे दिमाग में वो तस्वीर छपी हुई हैं। सुबह से तेरे बारे में ही सोच रहा हूँ में।
पापा की ये बात सुनकर मेरी धड़कने बढ़ गई, और मेरी आवाज तो पहले ही बंद हो चुकी थी।
पापा ने जब सोचा की मैं उनकी बात सुन रही हूँ लेकिन कोई जवाब नहीं दे रही हूँ, तो पापा ने बात आगे बढ़ाते हुए कहा – सुबह तूने नीले रंग की चड्डी पहनी थी ना?
पापा के मुँह से ऐसी बातें सुनकर थोड़ा अजीब लग रहा था लेकिन क्या करती, गलती भी तो मेरी ही थी। मैंने आँखे बंद कर ली और सोने का नाटक करने लगी, मैंने सोचा की वो चले जाएंगे।
पर ऐसा नहीं हुआ और अगले ही पल उन्होंने मेरी जांघ पर अपना हाथ रखा और जांघ सहलाने लगे। मैं चाह कर भी कुछ नहीं कर सकी, क्यों कि पापा के हांथों का स्पर्श मुझे अच्छा लग रहा था और मैं नहीं चाहती थी की मैं उनका विरोध करूँ और वो रुक जाए।
पापा ने मेरी जांघ को सहलाया और फिर मेरे पेट पर हाथ फेरने लगे। और धीरे धीरे उनका हाथ मेरे बोबे की तरफ बढ़ने लगा, और वो मेरे ब्लाउज के उपर से ही मेरे बोबे दबाने लगे।
काफी समय के बाद आज मुझे कुछ अच्छा महसूस हो रहा था। मेरे ख्याल में एक बार भी नहीं आया कि मैं उनकी बहु हूँ या वो मेरे ससुर जी हैं।
मेरी धड़कने बढ़ी हुई थी और मेरी चूत मे सिरहन उठ रही थी। मैं अपने पैरों को आपस में भींच कर अपनी मचलती हुई चूत को शांत कर रही थी। और तभी पापा ने मेरे गले में चूमना शुरू कर दिया। बारी बारी से वो मेरे गले की चारों तरफ और कान पर चूम रहे थे और फिर मेरी छाती पर चूमने लगे।
छाती को चूमते हुए मेरे ब्लाउज के हूक को एक एक कर खोलने लगे और मेरे क्लिवेज पर अपनी जीभ फेरते हुए चूमने लगे। और फिर मेरा ब्लाउज पूरा खोल दिया और ब्रा के ऊपर से मेरे दोनों बोबे मसलने लगे।
पेटीकोट में फँसी हुई सारी को मैंने निकाल दिया और सारी खोल दी। और पापा ने मेरे पैरों पर हाथ फेरना शुरू किया और पेटीकोट को ऊपर उठाते हुए उनके हाथ मेरी जांघों तक पहुँच गए। पापा के सख्त हाथों का मेरे जांघों पर छुना मुझे बहुत उत्तेजित करने लगा। और मेरे बदन में हवस की आग भड़कने लग गई।
पापा का हाथ धीरे धीरे मेरी पैंटी पर पहुँच गया और वो मेरी जांघों के बीच पैंटी के ऊपर अपनी उंगलियाँ फेरने लगे। मुझे बहुत मज़ा आ रहा था, मेरी चूत से भी तरल बाहर आने लगा जिससे मेरी पैंटी भीग कर चिकनी हो गई।
पापा भीगी हुई पैंटी पर ही अपनी उंगलियाँ चला रहे थे और पैंटी को मेरी चूत में दबा रहे थे। मैंने अपनी आँखें बंद कर ली और लंबी लंबी साँसे ले रही थी।
पापा ने मेरे पेट पर उंगलियाँ घुमाई और फिर मेरी पैंटी के अंदर हाथ डाल दिया और मेरी गीली चूत को सहलाने लगे। मैंने अपनी दोनों जांघों को आपस में दबा दिया। मेरे निप्पल कड़क हो गए और पूरे बदन पर रौंगटे खड़े हो गए।
फिर पापा उठे और उनका पजामा खोल कर चड्डी भी खोल दी, और नंगे हो गए। और फिर मेरी ब्रा और पैंटी खोल कर मुझे नंगी कर दी। फिर मेरे उपर लेट गए और मेरे होंठों को चूमने लगे। हम दोनों एक दूसरे के होंठों को चूस रहे थे। पापा का लंड तन कर एक दम कड़क हो रहा था और मेरी चूत पर टकरा रहा था। मेरे निप्पल पापा के सीने में गढ़ रहे थे। पापा की गरम साँसें मेरे चेहरे पर पड़ रही थी।
फिर मैंने पापा के कड़क लंड को पकड़ कर हिलाया और फिर लंड की चमड़ी को पीछे करके टोपा बाहर निकाला और चूत की दरार पर और क्लीटोरिस् पर रगड़ने लगी। इसे मेरा पूरा बदन कांपने लगा और मैं चूत मैं लंड लेने के लिए बेताब हो उठी।
पापा ने मेरी तड़प को भांप लिया और लंड को मेरी चूत पर सेट करके धीरे धीरे अंदर घुसाने लगे। चूंकि मैंने बहुत समय से चूत नहीं चुदवाइ थी इसलिए मुझे हलका दर्द होना शुरू हो गया, और जब पापा ने थोड़ा जोर लगाकर लंड को अंदर घुसाया तब लंड आधे से ज्यादा मेरी चूत में घुस गया और मेरे मुंह से धीमी आवाज मे चीख निकल गई।
पापा ने फिर भी लंड को पूरा अंदर घुसा दिया और फिर रुक गए और मेरे बोबे दबाकर मेरे होंठ चूमने लगे। जब हम दोनों चुंबन करने में लीन हो गए तब पापा ने लंड को थोड़ा पीछे किया और वापस झटके से अंदर डाल दिया, और इसी तरह पापा मेरी चूत चोदने लगे।
अब मेरा दर्द भी मजे मे बदल गया और मैं भी चुदवाने का आनंद लेने लगी। कुछ देर बाद पापा उठे और मेरे बगल मे आकर लेट गए और मुझे इशारे से बताया की मैं उनकी तरफ पीठ करके लेट जाऊँ, और मैं वैसे ही लेट गई।
फिर पापा मेरे पीछे चिपक कर लेट गए, मेरी गांड पर उनका लंड रगड़ने लगे और फिर मेरी एक टांग उपर कर के चूत का मुंह खोल दिया और फिर चूत में लंड घुसा दिया। मैं उनकी बाजू पर सर रख कर लेटी हुई थी, और वो दोनों हाथों से मेरे बोबे मसल मसल कर मेरी चूत मार रहे थे। मैं पूरी तरह से उनकी गिरफ्त मैं थी।
मुझे उनकी ताकत का अंदाज नहीं था लेकिन आज उनकी इतनी ताकत देखकर बहुत अच्छा लग रहा था। उनकी उम्र चाहे 55 साल हो लेकिन उनकी चूत मारने की ताकत जवान लौंडो से कई गुना ज्यादा है। और मैं अपने आप को खुशकिस्मत मान रही थी, कि मुझे उनसे चूत चुदवाने का मौका मिला।
पापा बहुत जोश में आ चुके थे और अब मेरे साथ थोड़ा हार्ड हो रहे थे। एक हाथ से मेरा गला दबा रहे थे और एक हाथ से पूरा दम लगा कर मेरे बोबे मसल रहे थे। मुझे बहुत दर्द हो रहा था लेकिन उससे ज्यादा मुझे आनंद मिल रहा था।
10 मिनट तक पापा ने मेरी चूत को चोदा और फिर उनकी झटके मारने की स्पीड बढ़ गई। पापा अब बिल्कुल चरम पर थे और उनकी हवस सातवें आसमान पर थी। उन्होंने मेरी चूत में झटके मारने के साथ साथ मेरी चूत को उंगलियों से मसलना भी शुरू कर दिया।
चुदाई के रस से पापा की उंगलियाँ भीग गई और उससे ही पापा मेरी चूत और पेट पर मलने लग गए और मेरी चूत को ताबड़तोड़ चोद रहे थे। और एक समय ऐसा आया जब पापा ने लंड को पूरा अंदर घुसा दिया और पूरा जोर लगा कर अंदर ही रुक गए और अगले ही सेकंड में मुझे मेरी चूत के अंदर उनके वीर्य की गर्मी का एहसास हुआ और पापा के लंड की कंपकपी मुझे चूत में महसूस होने लगी।
पापा ने एक लंबी सांस ली और मेरे बोबे कसकर पकड़ लिए, मेरे पीछे कसकर सट् गए और मेरे गले में अपना चेहरा रखकर चित्त हो गए। कुछ ही देर में उनका लंड ढीला पड़ गया और मेरी चूत से बाहर आ गया। और साथ में मेरी चूत से उनका वीर्य भी बाहर आ गया। और पापा सीधे होकर लेट गए।
फिर मैं उठी, मैंने मेरी पैंटी से मेरी चूत को साफ किया, बेडशीट को साफ किया और पेटीकोट ब्लाउज पहन कर बाथरूम चली गई। मेरी पैंटी को धोकर सुखाया और चूत को अच्छे से पानी से धोया और दूसरी पैंटी पहन कर वापस आई।
तब तक पापा भी उठ गए थे और अपने कपड़े पहन चुके थे। चुदाई के मूड और माहोल से बाहर आने के बाद अब शर्म आ रही थी। अब मैं पापा से नजरे नही मिला पा रही थी। लेकिन पापा तो जैसे मेरी चूत लेकर मुझसे खुल चुके थे। और मुझसे पूछ लिया – मीना! कैसा लगा तुझे?
मैंने कोई जवाब नही दिया और नजरे झुका ली।
पापा ने फिर से पूछा- बोल ना। कैसा लगा तुझे?
मैंने कहा- अच्छा ही लगा। आपको कैसा लगा?
पापा बोले- मुझे तो बहुत अच्छा लगा। आज बहुत समय के बाद जवान लड़की को चोदने का मौका मिला इसलिए अच्छा लगा।
मेरी भी शर्म थोड़ी कम हुई और मैं भी पापा के साथ खुलने की कोशिश करने लगी। क्यूँ की अब मुझे पता चल चूका था की ये आज जो हुआ वो पहली बार ज़रूर है लेकिन आखरी नहीं।
मैंने पापा से बोला- अच्छा?
पापा – हां बेटा, तु बहुत खूबसूरत है। मैं तुझे बहुत पसंद करता हूँ लेकिन तु मेरी बहु है इसलिए अब तक बोल नहीं सका।
मैं- तो आज कैसे बोल दिया?
पापा :- तुझे सुबह जब ऐसी स्थिति मैं देखा तो मेरे अरमान जाग गए और पूरे दिन से तेरे निप्पल मेरे दिमाग में घूम रहे थे। और मुझसे रहा नहीं गया तो मैं रिस्क लेकर तेरे पास आ गया। पहले तो बहुत सोचा के नहीं जाऊं, तु पता नहीं कैसे रिएक्ट करेगी। लेकिन बहुत सोचने पर ये भी समझ में आया कि तु भी तो प्यासी है, जब से मेरा बेटा गया है तब से तु अकेली है। तेरा भी मन करता होगा सेक्स करने का। इसलिए मैंने सोच लिया कि एक बार ट्राय करना चाहिए।
पापा की ये बात सुनकर मुझे समझ नहीं आया की मुझे कैसे रिएक्ट करना चाहिए। इसलिए हलकी सी मुस्कान के साथ उनकी बात खत्म कर दी।
उसके बाद मेरी सास के आने तक हम दोनों साथ ही रहे और इस बीच कई बार चुम्मा चाण्टी किया, हग किया, उन्होंने मेरे बोबे दबाए। मैंने उनके लंड को मुँह में लेकर चूसा। और उन्होंने मेरी चूत मार कर मुझे फिर से जन्नत की सैर करवाई।
उस दिन के बाद से अब हम मौके कि तलाश में रहते हैं, और मौका मिलते ही चुदाई का खेल खेलते है।
धन्यवाद…….
हैलो मीनाक्षी, आपकी तड़प देख कर बहुत फील हो रहा है। काश मैं आपकी चूत को मेरे 7 इंच के लण्ड से चोद कर आपकी तड़प दूर कर पाता।