Dost ki Ammi Ko choda story

दोस्त की अम्मी की प्यास बुझाई

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मेरी हरकतों पर वो भी हल्के से मुस्करा कर बात को टाल देती थी.

इस तरह से आंटी के लिए मेरी प्यास हर दिन बढ़ती ही जा रही थी. मैं उसको नंगी करके चोदने की फिराक में था लेकिन पता नहीं था कि वो दिन कब नसीब होने वाला है.

एक दिन की बात है जब मैं इमरान के घर गया हुआ था. खेल के बीच में ही इमराने के किसी दोस्त का फोन आ गया और वो मुझे घर पर उसकी मां के साथ ही छोड़ कर चला गया.

उस दिन पहली बार ऐसा हुआ था कि मैं उसकी मां के साथ घर पर अकेला ही था. मेरा मन था कि जाकर आंटी के चूचे दबा दूं लेकिन अभी मेरी इतनी हिम्मत नहीं हो रही थी. फिर मैं इमरान के कमरे में चला गया.

मैंने उसके कम्प्यूटर में टाइम पास करना शुरू किया. ऐसे ही देखते देखते मुझे उसके कम्प्यूटर में ब्लू फिल्म मिल गई. मैंने देखा कि आंटी अपने किसी काम में बिजी थी तो मैंने सोचा कि इमरान के आने तक ब्लू फिल्म देख लूं. वैसे भी मैंने बहुत दिनों से ब्लू फिल्म नहीं देखी थी. मैं उसके रूम का दरवाजा बंद करके ब्लू फिल्म देखने लगा. मेरा लंड एकदम से खड़ा हो गया.

मैं अपने लंड को लोअर के ऊपर से ही सहलाने लगा. फिर एकदम से आंटी दरवाजा खोल कर अंदर आ गई और उन्होंने मुझे ब्लू फिल्म देखते हुए अपने लंड को हिलाते हुए देख लिया. उनके हाथ में चाय का कप था.
उन्होंने एक बार मेरी तरफ देखा और फिर ऐसे रिएक्ट किया जैसे वो मेरी इस हरकत पर गुस्सा हो गई हो; वो चाय को रख कर वापस चली गई.

मैंने सोचा कि इससे पहले कि बात इमरान तक पहुंचे मुझे कुछ करना चाहिए. अगर आंटी ने मेरी यह हरकत इमरान को बता दी तो शायद मैं इमरान के घर पर भी नहीं आ पाऊँगा उसके बाद। इसलिए मैं आंटी को सॉरी बोलने के लिए चला गया.

आंटी रसोई में कुछ काम कर रही थी. जब उन्होंने मुड़ कर मुझे देखा तो वो नॉर्मल ही लगी.
फिर मैंने हिम्मत करके खुद ही कहा- आंटी मुझसे गलती हो गई. मुझे ऐसी हरकत नहीं करनी चाहिए थी.
आंटी बोली- कोई बात नहीं इस उम्र में लड़के ऐसे ही काम किया करते हैं.

मैं आंटी की बात सुन कर हैरान था इसलिए मेरी हिम्मत और बढ़ गई. मैंने आंटी की गांड को ताड़ना शुरू कर दिया और मेरा लंड वहीं पर ही खड़ा होने लगा. फिर पता नहीं क्या हुआ कि मैंने आंटी की गांड को दबाने के लिए हाथ बढ़ाए लेकिन मैं डर के मारे रुक गया कहीं बात बिगड़ न जाये.

फिर आंटी ने कहा- तुम यहां पर क्या कर रहे हो, बाहर हॉल में चले जाओ.
आंटी मेरे लंड को देख रही थी. आंटी ने एक बार मेरे लंड की तरफ देखा और फिर बोली- मैं तुम्हारे लिए कुछ खाने के लिए लेकर आती हूं.

मैं निराश होकर बाहर चला गया.

फिर कुछ देर के बाद आंटी चाय लेकर बाहर आ गई. वो मेरे सामने जब चाय का कप रखने के लिए झुकी तो मैंने आंटी की चूचियों को देख लिया. मेरे मन में एक आह्ह सी निकल गई. आंटी की चूचियों की दरार बहुत मस्त थी. आंटी ने भी मुझे ऐसा करते हुए देख लिया था. फिर वो मेरे सामने ही बैठ गयी.

चाय पीते हुए आंटी ने पूछा- तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है क्या?
मैंने आंटी को कहा- मेरी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है।
मैंने कहा- आंटी आप तो बहुत सुंदर हो. अगर मैं आपका पति होता तो … कहते हुए मैं रुक गया.
आंटी बोली- क्या?
मैंने कहा- कुछ नहीं।
वो बोली- बता दो, कोई बात है तो।
मैंने कहा- आंटी आप तो बहुत सुंदर हो। अगर मैं आपका पति होता तो आपको बहुत प्यार करता और आपको किसी बात की कमी नहीं होने देता।

मेरे बहुत कहने के बाद उन्होंने मेरे लंड को अपने मुंह में भी ले लिया.

दो मिनट तक आंटी ने लंड चूसा और फिर बाहर निकाल लिया. उसके बाद वो कहने लगी कि बस इससे ज्यादा मैं नहीं कर पाऊंगी. मैं समझ गया कि आंटी को उनके पति ने लंड चूसने की आदत नहीं लगाई है. अगर वो अपने पति का लंड भी चूसती तो मेरे लंड को बड़े ही मजे से चूस लेती. फिर मैंने आंटी की जांघों को अपने हाथों से पकड़ कर खोल दिया और अपने लंड को आंटी की चूत के बीच में लगा दिया.

लंड को चूत के बीच में लगा कर मैंने धक्का मारा तो आंटी की सिसकारी निकल गई.

फिर मैंने आंटी की चूत को चोदना शुरू कर दिया. आंटी की चूत को चोदते हुए मुझे मजा आने लगा और आंटी के मुंह से भी कामुक सिसकारियां निकलने लगीं.
आंटी बोली- मैंने पूरे एक साल बाद लंड का स्वाद चूत में लिया है.

मैं आंटी को पूरा मजा देते हुए उनकी चूत को चोदने लगा. आंटी भी अपनी चूत को चुदवाने का पूरा मजा ले रही थी. मेरे धक्कों के साथ आंटी के चूचे भी तेजी के साथ हिल रहे थे. आंटी मस्त हो गई थी.

फिर मैंने अपनी स्पीड तेज कर दी और आंटी की चूत को दस मिनट तक लगातार चोदने के बाद मेरा माल निकलने को हो गया.
मैंने आंटी से पूछा- मैं अपने माल को कहां पर निकालूं?
तो आंटी कहने लगी- मेरी चूत में ही निकाल दो. मैं तुम्हारे माल को अपनी चूत में ही लेना चाहती हूं.

फिर मैंने दो धक्के लगाये और मेरे लंड का माल आंटी की चूत में गिरने लगा. मैंने आंटी की चूत को अपने माल से भर दिया. आज पहली बार मेरे लंड से इतना सारा माल निकला था. मैंने आंटी की चूत में कई पिचकारी मारी और फिर मैं आंटी के ऊपर ही लेट गया.

उसके बाद आंटी ने मुझे प्यार से उठाया और हम दोनों बाथरूम में चले गये. वहां जाकर हम दोनों ने साथ में ही स्नान किया और आंटी की चूत को मैंने अपने हाथों से ही साफ किया. आंटी ने भी मेरे लंड को अपने हाथ में लेकर धोया.

उस दिन आंटी ने फिर मुझे खाना खिलाया और फिर रात को दोबारा आने के लिए कह दिया. इस तरह से दो दिन तक मैं और आंटी चुदाई का मजा लेते रहे.
आंटी भी मुझसे खुश हो गई और बोली- अब तुम जब चाहो मेरे घर पर आकर मेरी चूत को चोद सकते हो. अब हमें जब भी मौका मिलता है हम दोनों चुदाई का मजा लेते रहते हैं.

दोस्तो, आपको मेरे दोस्त की अम्मी की चुदाई कहानी कैसी लगी आप मुझे मेल के जरिये जरूर बताना. मुझे आपके मैसेज का इंतजार रहेगा.

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