बस में मिली कमसिन कली
दोस्तों मैं हूँ रोहन और मैं आज आपको बस में मिली एक अठारह साल की कमसिन लड़की की कहानी सुनाने जा रहा हूँ |
तो दोस्तों कहानी कुछ यूं शुरू होती है कि मैं दिल्ली से ऋषिकेश स्लीपर बस में जा रहा था, चूँकि मुझे अकेले घूमना पसंद है इसलिए मैंने दिन की बस को बुक किया और सुबह समय से पहुँचकर अपनी बस का इंतज़ार करने लगा| कुछ समय बाद बस आई मैंने उसके लगेज कम्पार्टमेंट में अपना बैकपैक रखा और अपनी लोअर बर्थ SL4 में जाकर बैठ गया और सीसे से बाहर देखने लगा तभी वहाँ एक लड़की जिसने एक मेहरून रंग का वन पीस पहना था आई और अपना ट्राली बैग लगेज सेक्शन में रखकर बस में चढ़ने लगी|
उसे देखकर मैं स्तब्ध रह गया और उसकी ख़ूबसूरती का मन ही मन आकलन करने लगा, वह एक बेहद आकर्षक व्यक्तित्व की धनी थी, उसने अभी-अभी जवानी की दहलीज़ पर कदम रखा था । उम्र अठारह या उन्नीस की थी रंग साँवला परंतु गठीला बदन, सर से लेकर पांव तक उस वन पीस में वह कामुकता परोस रही थी; वह बस में आकर सीट SL2 खोजने लगी; वह मुझसे डायगनली एक आगे वाला दो लोगो वाले केबिन में अकेले थी और मैं सिंगल वाले केबिन में, इस बस में स्लाइडिंग डोर के बदले पर्दे लगे थे जो हल्के रंग के काफ़ी पुराने थे। जब वह अपनी जगह पर बैठ गई या यूँ कहें लेटने लगी तो डायगनल एंगल के कारन मुझे थोड़े से खुले पर्दे में से उसकी नंगी जांघो को देखने का सौभाग्य प्राप्त हुआ और उसे देखकर मेरे मन में सरसराहट दौड़ पड़ी और जब बस चली तो उसने अपने क्रॉस किए पैरों को खोला तो मुझे उसकी काली शॉर्ट्स दिखी जिससे मेरी उतेज़ना आसमान पर पहुँच गई ।
अब मैं अपने फ़ोन और खिड़की से ज़्यादा, नज़रे चुराते हुए उसे देखने का हरसंभव प्रयास करने लगा। यह सिलसिला कुछ एक घंटे तक चला और फिर बस एक आलीसन से रेस्टोरेंट में जाकर रुकी और कंडक्टर ने लॉबी एरिया में आकर कहा बस आधे घंटे के लिए यहाँ रुकेगी। अब सभी सवारियां नीचे उतरने लगी। मैंने इंतज़ार करना ठीक समझा और मैं वही अपने आसन पर विराजमान रहा ।
जब बस से सब उतर चुके थे तो उस लड़की ने अपने केबिन के पर्दे खोले और अपनी लाँग हील सैंडल पहनने लगी; फिर आगे जाकर बस से उतरने के उलट वह पीछे की और आई और मेरे केबिन के पर्दे खोलकर बोली; “ हे यू मिस्टर, मैं कब से देख रही हूँ कि तुम मुझे चोरी-चोरी नज़रों से मेरे केबिन में मुझे देखे जा रहे हो;
मैंने कहा: “नहीं तो, मैं नहीं देख रहा आपके तो कर्टेंस भी बंद है “ यह बोलकर मैं फँस गया, उसने तुरंत कहा देखा तुम देख रहे हो इसीलिए तुम्हें पता है कि कर्टेंस बंद थे। इन सब के बीच मैंने उसका नीचे से ऊपर तक बहुत करीब से दीदार किया और हर साँस के साथ उसमें से आती मादक खुशबू को अंदर तक उतारने का भरसक प्रयास किया और ऐसा करते मैं, उसके क्लीवेज जोकि उसके महरून वन पीस में से दिख रहे थे, खो गया तो उसने चुटकी बजाकर मेरा ध्यान वापिस खींचा और गुस्से वाली आँखे दिखाकर बस से उतर गई और मैं भी अपनी नॉट सो गुड क़िस्मत मानकर बस से उतर गया ।
अब मैंने रेस्टोरेंट में जाकर एक कोने वाली टू सीटर टेबल पकड़ ली और अपना सैंडविच खाने लगा तभी वही लड़की हाथ में छोले भटूरे की प्लेट लिए इधर उधर जगह देखने लगी; चूँकि एक साथ चार बस वहाँ आकर रुकी थी तो वहाँ कोई टेबल खाली नहीं थी, यदि थी भी तो फैमिली टेबल्स जिसपर बैठना बहुत अव्क्वार्ड हो जाता उसके लिए, इसलिए वह ठीक मेरे सामने आकर बैठ गई और मैंने बस वाली बात से सबक लेते हुए एक बार भी नज़रे उठाकर उसे नहीं देखा; पर हाँ अपनी स्टील की प्लेट में उसका रिफ्लेक्शन हर सेकंड देखता रहा। वह उस रिफ्लेक्शन में भी उतनी ही हसीन लग रही थी। मेरा सारा ध्यान मेरे सैंडविच पर था और मेरी आत्मा उसकी रिफ्लेक्शन पर जो मेरे प्लेट में बन रहा था । अब मैंने सैंडविच ख़त्म किया और हैंडवॉश करने के इरादे से टैप के पास गया और जाकर हाथ धोने लगा, उसने भी अपने भटूरे ख़त्म किए और मेरे बगल में आकर हाथ धोने लगी ।
मैंने अब सख़्त लौंडा वाली पालिसी अपनाने की सोची और जल्दी से हाथ धोकर जाने लगा तभी बस कंडक्टर की आवाज़ आई “चलो चलो बस चलने वाली है” तो वह दौड़कर मुझसे आगे निकल गई और बस में जाकर बैठ गई। मैं उसे इग्नोर करते हुए अपनी सीट पर गया और अपने कर्टेंस लगा लिए और फ़ोन मैं मूवी देखने लगा ।
बस चले अभी दस ही मिनट्स हुए थे की बस में कोहराम मच गया कि फ़ोन खो गया है, वन पीस वाली लड़की का फ़ोन गुम गया है, वह कहने लगी कि जिस रेस्टोरेंट में बस रुकी थी, उसका फ़ोन वहीं छूट गया है पर बस ड्राइवर और कंडक्टर ने बस वापिस घुमाने से मना कर दिया और उस से कहा; आप बस से उतर जाओ और अपना फ़ोन ले लो “आफ्टर ऑल फ़ोन इज इंपोर्टेंट”, हमारी बस की लाइव ट्रैकिंग होती है, हम बस नहीं घुमा सकते। मुसीबत हो जाएगी हमारे लिए, “ लड़की वापिस अपनी सीट पर आकर रोने लगी” तब मैंने उसकी और देखा उसके सर से होते हुए मैं पैरों तक पहुँचा तो देखा वहाँ एक लाल रंग का फ़ोन उसकी ड्रेस से मैच होता, उसके सैंडल के पास पड़ा है।
मैं अपनी जगह से उठकर उसकी और बढ़ा और उसके पैरों पर झुका; वह घबरा गई उसने सकपकाकर मेरी और देखा, मैंने फ़ोन उठाकर उसके हाथ में रखा और बिना उसका धन्यवाद सुने पलट गया और अपनी सीट पर आकर लेट गया । बस अब चल चुकी थी।
अब वह चोर नज़रों से मुझे देख रही थी और मैं उसे इग्नोर करते हुए अपनी मूवी देखने में व्यस्त था कि तभी उसने आकर मुझे हाथों से हिलाया और बोली “थैंक यू सो मच “ मैंने अधिक भाव ना देते हुए अपना सर हिलाकर हामी भरी। अब उसने कहा; “मेरा बॉटल में पानी ख़त्म हो गया है क्या आप पानी दे सकते हो?” मैंने कहा मेरा पानी झूठा है, जिसपर उसने कहा कोई नहीं मैं पी लुंगी और मेरे हाथ से बॉटल ले ली और मेरी और कोतुहल भरी नज़रों से देखने लगी फिर मेरे पैरों को हाथ से धक्का देकर वहीं बैठ गई और कहने लगी “पानी हमेशा बैठकर ही पीना चाहिए “, और सारा पानी पी गई, बस चल रही थी तो पानी पीते हुए कुछ पानी बॉटल से बाहर छलककर उसकी चिन से होते हुए उसकी गर्दन से लुढ़ककर उसके वन पीस ड्रेस को भीगाता हुआ उसके क्लीवेज में जाकर कहीं खो गया और उसकी ब्लैक ब्रा अब पानी के प्रभाव से दिखने लगी अब मैंने उसे पहली बार इस कामुक रूप में देख जिसका उसने मुस्कुराकर स्वागत किया ।
उसने अब खुदसे कहा मेरा नाम नेहा है और तुम?
मैं: रोहन
नेहा: कहाँ जा रहे हो?
मैं: ऋषिकेश
नेहा: सोलो ट्रैवलिंग
मैंने हम्म कहकर बात ख़त्म करनी चाही पर नेहा ने और दिलचस्पी दिखाते हुए ख़ुद ही बताया मैं देहरादून जा रही हूँ
जिसपर मैंने अच्छा कहा और मूवी देखने की एक्टिंग करने लगा।
नेहा ने मेरे कान से इयरफोन्स निकाले और सॉरी और थैंक्यू कहते हुए मेरे गाल पर किस किया और नॉटी सी स्माइल देती हुई अपने केबिन में चली गई ।
मैं फिर से अपनी मूवी देखने में व्यस्त हो गया तभी बस में अचानक ब्रेक लगे तो मेरी नज़र नेहा पर पड़ी, वह अपनी दोनों पैर खोल कर खिड़की से बाहर देख रही थी मानो जानकर मुझे अपनी ब्लैक पैंटी दिखाना चाहती हो, उसका यह खुला न्यौता मुझे रिझाने के लिए काफ़ी था पर मैंने और सख्ती दिखाते हुए इग्नोर किया तो इस बार उसने अपनी ब्लैक पैंटी को ही उतार दिया और टाँगे फैलाकर मेरी और देखने लगी; अब मैं टकटकी लगाए उसकी क्लीन शेव्ड चूत को देख रहा था, उसने पलखें झपकाकर मुझे अपनी और आने का इशारा किया, मैंने बिना विलंब किए वहाँ जाना उचित समझा।
वहाँ पहुँचते ही नेहा ने कर्टेंस को अच्छी तरह से बंद किया और मेरे होठों पर अपने रसीले होठ रख दिए, उसके होठों से ख़ुशबू और मिठास दोनों आ रही थी मानो कुछ देर पहले ही उसने लिपग्लोज़ लगाया हो । उसके होंठों को मैंने बारी बारी से चूसा या यूँ कहे उनका रस पिया, पहले मैंने नेहा के अपर लिप को अपने होठों के बीच में रखकर उसका रसपान किया और फिर उसके लोअर लिप को आड़े हाथों लेते हुए उसका सारा रस निचोड़ डाला। यह करते हुए मेरे हाथ उसके महरून वन पीस को ऊपर उठाकर उसके नितंबों को कसकर दबा रहे थे जिससे किस के दौरान उसकी आँखें मुझे घूरकर कह रही थी कि जान आराम से करो मैं पूरे रास्ते तुम्हारी ही जागीर हूँ ।
क़रीब पंद्रह मिनट तक किस के बाद मैंने अपना जादू दिखाना शुरू किया और उसके वन पीस और ब्लैक ब्रा को उसके शरीर से अलग किया। अब वह मेरे सामने पूर्णतः नग्न अवस्था में थी जिसके कारण उसकी आँखों में शर्म दिखने लगी थी । मैंने देर ना करते हुए उसे वहीं लिटाकर उसके पैरों से उसे चूमना शुरू किया और धीरे धीरे उसे चाटते हुए उसकी जांघों पर पहुँचा जिसे देखकर मुझे नेहा के प्रति हवस चढ़ी थी । मैंने अब उसकी जांघों को किस करना शुरू किया और नेहा लगातार अपने मुंह से मादक आवाज़े निकाल रही थी; आह रोहन ओह रोहन आह ओह येस, जिसे सुनकर मैंने बीच बीच में उसे जांघों पर हल्का काट भी लिया था जिस से उत्तेजित होकर उसने अपने हाथों से मेरे सर को कई बार दबाया ।
इन सब अनुभव से उसे लगा कि मैं अब उसकी चूत की और जाऊँगा इसीलिए उसने अपनी टाँगे फैलाई पर मैं जल्दी में बिल्कुल नहीं था ।
मैं आज नेहा को ऐसा अनुभव देना चाहता था जिसे वह ताउम्र याद रखे इसलिए मैं जांघों से उसकी चूत पर ना जाकर उसकी नाभि की और बढ़ चला और उसके पेट पर अपनी जीभ का जादू दिखाने लगा उसकी सिसकियाँ (आह आह ओह रोहन…) रुकने का नाम नहीं ले रहीं थी, जैसे ही उसकी चूत से रस बहता उसके हाथ ख़ुद ब ख़ुद मेरा सर बालों सहित पकड़कर दबाने लगते ।
ऐसा करने के बाद मैं उसके स्तनों की और बढ़ा जिसे देखकर मेरा लंड कुतुबमीनार रूप धारण कर चुका था । उसके गोल गोल चूचों पर बीच में छोटे छोटे निपल्स मुझे पागल कर रहे थे। उसके आम रूपी खड़े निपल्स को देखकर मुझसे रहा ना गया और मैंने आव देखा ना ताव उसके चूचों पर टूट पड़ा । मैंने राइट वाले पर जीभ गोल गोल घुमानी शुरू की तो उसके हाथ के नाखून मेरी पीठ में गढ़ने लगे, मैंने अब लेफ्ट वाले निप्पल को लेफ्ट हैंड से जोर से दबाना चालू किया और राइट को मुंह में भरकर जोर से चूसने लगा मानो उसमे से दूध निकलेगा । इस सब से नेहा मदहोश होने लगी और हर गुजरते पल के साथ उसकी चूत गीली होती गई और उसकी पकड़ मुझ पर कड़ी होती गई ।
नेहा के सब्र का इम्तिहान चल रहा था जिसमे उसे पास होना था पर वो अपने चरम पर थी तो कहने लगी
नेहा: रोहन बेबी सुनो
मैं: हम्म (क्यूंकि उसक एक बूब मेरे मुंह में दूसरा हाथ में था)
नेहा: कितना तड़पाओगे यार, इस जीभ का जादू चूत पर भी तो दिखाओ
(यह कहती हुई उसने अपने नाखून अंदर गड़ा दिए और कुछ सेकेंड्स में उसकी पकड़ ढीली हो गई)
मैं समझ चुका था कि नेहा की चूत पानी छोड़ चुकी है।
नेहा ने मुझे गले लगाया और आँख बंद कर ली, अब मेरी बारी थी तो मैंने देरी ना करते हुए उसकी चूत की और बढ़ा। उसकी चूत पूरी तरह से गीली थी और वह बेढाल पड़ी, पूरी तरह से ख़ुद को मुझे सौंप चुकी थी। मैंने अपनी उँगलियों से उसकी चूत को खोलते हुए उसके ऊपरी सिरे के दाने पर अपनी जीभ लगा दी और जीभ से उन्हें सहलाने लगा मानो कोई कुत्ता पानी पीते हुए अपनी जीभ अंदर बाहर कर रहा हो । इस एहसास से नेहा के तन बदन में फिर से ज्वाला भड़कने लगी और वह अब दोनों पैरों को से मेरे चेहरे को दबाने लगी। मैंने उसके चूत के आख़री सिरे तक अपनी जीभ पहुंचाई और वह दूसरी बार झड़ गई। उसका सारा पानी, जो लिक्विड जेली सा नमकीन था, मैं पी गया और अब उसके चेहरे पर दो बार चरमसुख प्राप्त करने की संतुष्टि दिखने लगी थी ।
आगे की कहानी आपको अगले भाग में सुनाऊँगा
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